गीता दान संस्थान, इंदौर आप सभी श्रद्धालुओ का स्वागत करती है। गीता दान संस्थान का मुख्य उद्देश्य मानव कोे उनके जन्मदिवस पर गीता ग्रंथ का उपहार दान स्वरुप कर गीता ज्ञान प्रदान कराना है ।'गीता के ज्ञान से देह त्यागने पर मोक्ष प्राप्त होता है। हमारे इस छोटे से प्रयास को अपनी अगली वर्षगांठ पर स्वेच्छा से गीता की पांच पुस्तक दान कर सहयोग प्रदान कर सफल बनाए। "दान देना भी कर्तव्य है "आप सभी से निवेदन है कि आप अपना नाम, पता, फोन नम्बर, जन्मतिथि हमे भेजे और अपने जन्मदिवस पर गीता ग्रंथ का उपहार दान स्वरुप प्राप्त करे।

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श्रीमद्भगवद्गीता एक परम रहस्यमय ग्रन्थ है , जिसमें संपूर्ण वेदों का सार संग्रह किया गया है । इसकी सुन्दर और सरल संस्कृत को थोड़ा अभ्यास करने से सहज समझा जा सकता है , परन्तु इसके गंभीर आशय का अंत आजीवन निरंतर अभ्यास करने पर भी नहीं आता । शांत और एकाग्रचित होकर श्रद्धा-भक्ति सहित विचार करने से इसके प्रत्येक पद में परम रहस्य भरा हुआ प्रत्यक्ष प्रतीत होता है ।  श्रीगीताजी को भली प्रकार पढ़कर,अर्थ और भाव सहित अन्तःकरण में धारण कर लेना मुख्य कर्तव्य है कल्याण की इच्छा वाले मनुष्यों को उचित है कि मोह का त्याग कर अतिशय श्रद्धा-भक्तिपूर्वक अपने बच्चों को अर्थ और भाव के साथ श्रीगीताजी का अध्ययन कराएँ।  स्वयं भी इसका पठन और मनन करते हुए भगवान की आज्ञानुसार साधन करने में समर्थ हो जाएँ क्योंकि अतिदुर्लभ मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर अपने अमूल्य समय का एक क्षण भी दु:खमूलक क्षणभंगुर भोगों के भोगने में नष्ट करना उचित नहीं है।  आज भी मनुष्य जब जीवन के कई पड़ावों पर आकर परिस्थितियों से मजबूर हो जाता है तो श्रीमद्भगवद्‌गीता ही उसे सही मार्ग दिखाती है। यह ग्रंथ उस मनुष्य को हमेशा ही सत्य का मार्ग चुनने की सलाह देता है।

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